STOP LIVING IN PAST!! अतीत में जीना छोड़ें!!!

अतीत में जीना छोड़ें 


कहा जाता है कि खुली आँखों से देखे गए सपने सच होते हैं क्योंकि वे सपने हम वर्तमान  में रहते हुए, अपने व औरों के उज्जवल भविष्य के लिए देखते हैं। कुछ सपने ऐसे भी होते हैं जिन्हें बार-बार देखते रहने से हमारे वर्तमान और भविष्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है। 

बीता पल सपने की तरह है 

हमारा हर बीता हुआ पल सपने की तरह ही तो है। जैसे नींद से जागने के बाद, देखे गए स्वप्न को हम याद कर सकते हैं और उसका वर्णन भी कर सकते हैं परन्तु उसमें बदलाव नहीं कर सकते। ठीक इसी तरह, जीवन में घटित अच्छी-बुरी घटनाएं हम बार-बार याद कर सकते हैं, उनका वर्णन भी कर सकते हैं परन्तु चाहते हुए भी उनमें कोई परिवर्तन नहीं कर सकते। ऐसा व्यक्ति जो अपनी ज़िंदगी के पिछले पन्ने उलटने में ही अपना वर्तमान खर्च कर रहा है, घाटे का शिकार रहता है। 

छूटें अतीत की बेड़ियों से 

भगवन कहते हैं, बीती को बिंदी लगा दो, उसे चितवो नहीं। अतीत की गलियों में रमण करने की आदत आपको अमूल्य वर्तमान समय का लाभ नहीं लेने देगी। वर्तमान समय मिल रही खुशियों और नए अनुभवों से भी यह आदत वंचित कर देगी जिसका नकारात्मक प्रभाव आपके भविष्य पर भी पड़ेगा। वैसे भी कहा जाता है कि कल होता नहीं है। जो भी है बस यही एक पल है, जो हमारा अपना वर्तमान है। हाँ, पुराने अनुभवों से शिक्षा लेकर उनका इस्तेमाल वर्तमान को सुखद बनाने में किया जा सकता है। 

पुरानी चीज़ों से लगाव 

मनुष्य का स्वभाव ऐसा है कि उसे नवीनता पसंद है, जिसके अभाव में वह जीवन में निरसता अनुभव करता है। परन्तु, साथ ही उसे अपनी पुरानी वस्तुओं से भी बहुत लगाव होता है। फिर भी व्यर्थ तो व्यर्थ ही होता है। जिन पुरानी बातों, दुखद घटनाओं  और यादों से हमें वर्तमान समय दुःख, निराशा, आत्मग्लानि या इसी तरह के अन्य नकारत्मक भावों के अलावा कुछ नहीं मिल रहा है, उनको बार-बार याद करना बुद्धिमानी नहीं मानी जा सकती। 

बुद्धि रुपी फ्रीज 

हम कितनी भी महंगी, ताज़ी और स्वादिष्ट सब्ज़ी या फल फ्रीज में रख दें और समय रहते इस्तेमाल न करें तो ये सड़-गल जाएंगी। इनकी बदबू चारों ओर फैलेगी, इससे हमें तथा आसपास वालों को परेशानी होगी। हमारे बुद्धिरूपी फ्रीज में भी न जाने कितनी ही पुरानी सड़ी-गली बातें, यादें, दुखद घटनाएं पड़ी  जिनकी बदबू, अतीत के पट बार-बार खोलकर देखते रहने से हमें परेशान कर देती है। उन नकारात्मक भावों की दुर्गंध हमारे भाव-स्वभाव को दूषित करती है जिसका बुरा प्रभाव वर्तमान के संबंध-सम्पर्क वालों पर पड़ता है। यदि किसी के साथ हमारा पिछला अनुभव बुरा रहा हो तो वर्तमान समय भी उस व्यक्ति से सामना होने पर हमारा व्यवहार उसी नकारात्मकता से युक्त होगा क्योंकि हमने अपने बुद्धि रुपी फ्रीज की सफाई की नहीं है। 

बुद्धि की सफाई 

बुद्धि को साफ़-सुथरा रखने के लिए अपने बीते हुए कल से समझौता करना सीखें। पुराने अनुभवों से शिक्षा लेकर स्वयं को सशक्त बनाएं, स्वयं को और दूसरों को सच्चे दिल  से माफ़ कर दें। साथ ही जिनका जाने-अनजाने दिल दुखाया हो, उनसे मन ही मन क्षमा मांग लें। इस तरह से अपना पुराना खाता समाप्त करके हल्के हो जाएं। सदा याद रखें कि इस बेहद विश्वनाटक का हर पल कल्याण से भरा हुआ है क्योंकि स्वयं कल्याणकारी शिव पिता परमात्मा इस समय हम बच्चों के साथ है। अब यह हमारे हाथ में है कि हम पुरानी यादों का बोझा वर्तमान के कन्धों पर ढोते हुए, कछुए की रफ़्तार से थके हुए चलें या फिर अतीत को कल्याणकारी रूप से स्वीकार करते हुए, हल्के होकर पंछी की तरह भविष्य की ऊँची उड़ान भरें। 

ॐ शांति।   

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