50 LIFE CHANGING THOUGHTS IN HINDI ON LIFE | BK QUOTES ON LIFE | 50 STATUS ON LIFE FOR FACEBOOK AND WHATSAPP

50 जीवन बदल देने वाले विचार!!!



१) सबसे पक्की दोस्ती पहले अपने से कीजिये क्योंकि सबसे ज़्यादा खुद के साथ ही रहा जाता
 है। 

२) ढोंग से नहीं, ढंग से जियें। 

३) पैर की मोच और छोटी सोच हमें आगे बढ़ने नहीं देती। 

४) टूटी कलम और औरों से जलन खुद का भाग्य लिखने नहीं देती। 

५) सबसे पहले अपने ऊपर विश्वास स्वयं कीजिये, इसके बाद ही सारी दुनिया भी करेगी। 

६) विशेष बनने की इच्छा के साथ नहीं पर शुद्ध बनने के उद्देश्य के साथ जियें। 

७) जो बहुत सीमित होते हैं अपने शब्दों में, वो बहुत विस्तृत होते हैं अपने अर्थों  में। 

८) दुनिया में लोग बुद्धिमान लोगों की प्रशंसा करते हैं, धनवानों से ईर्ष्या करते हैं, शक्तिशाली से डरते हैं, लेकिन विश्वास केवल चरित्रवान पर करते हैं।

९) गाड़ी पंक्चर हो जाने से सफर नहीं छोड़ा जाता और परेशानियों से हारकर लक्ष्य नहीं छोड़ा जाता। 

१०) जब आप किसी से मिल रहे होते हैं तब आपका चरित्र उससे मिल रहा होता है। 

११) किसी को सहानुभूति देना, उसके घाव पर मरहम लगाने जैसा है। 

१२) अपनी कमियों से सावधान रहें क्योंकि ये वो दुश्मन हैं जो छुपकर वार करते हैं।

१३) सच्ची मेहनत कभी थकाती नहीं, वो संतोष पैदा करती है। 

१४) काम का आलस और पैसों का लालच हमें महान बनने नहीं देता। 

१५) अपना मज़हब ऊँचा और गैरों का ओछा, ये सोच हमें इंसान बनने नहीं देती। 

१६) स्वयं को पहचानने से अधिक कोई ज्ञान नहीं और क्षमा करने से बड़ा कोई दान नहीं। 

१७) नफरत करने वालों को जितने गहरे मन से महसूस करते हैं, प्यार करने वालों को भी वैसे ही महसूस कीजिये। 

१८) अधिकतर लोग बात को समझने के लिए नहीं बल्कि जवाब देने के लिए सुनते हैं। 

१९) कई बार सूर्योदय होने पर नहीं लेकिन आपके जागने पर सवेरा होता है। 

२०) व्यवस्था पर इतने सवाल न उठाएं की अवस्था खराब हो जाये।    

२१) जिसे अपनी गुजर के लिए किसी का मुँह नहीं ताकना पड़ता, वह धनी है। 

२२) लाखों की संपत्ति इकट्ठी होने पर भी अगर तृष्णा शांत न हुई हो तो वह गरीब है। 

२३) अमीर वह नहीं जिसने हज़ारों-लाखों इकट्ठे किये हैं बल्कि वह है जिसने हज़ारों लाखों दान दिए हैं। 

२४) धन्य होने से कोई पुण्य - फल का भोक्ता कहा जा सकता है, पुण्यात्मा नहीं। 

२५) योग्यता धन कमाने में नहीं है किन्तु ईमानदारी से धन कमाने में है। 

२६ ) बहुत धनि ऐसे हैं, जो नहीं जानते की वे धन के स्वामी नहीं है, धन उनका स्वामी है। 

२७) जीवन के लिए धन है, धन के लिए जीवन नहीं है। 

२८) धन से ही कोई धनी नहीं होता, बैल के ऊपर धन लादने से क्या बैल धनी हो जाएगा?

२९) कद बढ़ा नहीं करते एड़ियां उठाने से, ऊंचाइयां तो मिलती है सर झुकाने से। 

३०) भरोसा रखें," हम जब कहीं किसी का अच्छा कर रहे होते हैं तब हमारे लिए भी कहीं अच्छा हो रहा होता है। 

३१) अगर आप ज़िंदगी की दौड़ में धीरे चलते हुए भी कभी रुके नहीं है, तो यकीन मानिये, आप सबसे तेज़ हैं। 

३२) कोई भी पीछे जाकर नई शुरुआत नहीं कर सकता, पर हम सब नई शुरुरात करके बेहतर अंत कर सकते हैं।  

३३) लोग इसकी परवाह नहीं करते कि  आप कितना ज्यादा जानते हैं, वे तो ये देखते हैं कि आप कितना ख्याल रखते हैं।  

३४) लोगों का क्या, आज हैं कल नहीं।  वक्त के साथ बदलते रहते हैं। परन्तु कर्मों का फल साया बन कर साथ चलता है।  

३५) महान उपलब्धियां लगातार की जाने वाली छोटी-छोटी उपलब्धियों का कुल योग होती हैं। 

३६) वह व्यक्ति जिसे खुद पर भरोसा होता है, वही आखिरकार दूसरों का भरोसा जीतने में भी कामयाब रहता है।  

३७) मज़बूत, वही करते हैं जो उन्हें करना है और कमज़ोर वही मानते हैं जो उन्हें मानना है। 

३८) एक चीज़ जिससे डरा जाना चाहिए, वह है डर। 

३९) बिना समझ का ज्ञान बेकार है। 

४०) एक बहुत पुराणी कहावत लेकिन आज भी नई, स्वार्थ व्यक्ति को अँधा कर देता है। 

४१) अपने कार्य को योजना बनाएं, तथा अपनी योजना पर कार्य करें। 

४२) जीवन पथ पर कभी अकेले पड़ जाने पर ही हम जान पाते हैं कि  हम कितने पानी में हैं और हमारे साथ हम खुद हैं भी या नहीं।  

४३) जिसने अपने विगत अनुभवों से सीखना सीखा हो, उसके लिए ही शिक्षाओं द्वारा सीखना भी सहज हो पाता है।  

४४) अमृत पीने वालों की नहीं पर विष पीने वाले की तस्वीर घर-घर में है। 

४५) तयारी करने में फ़ैल होने का अर्थ है, फ़ैल होने की तयारी करना। 

४६) जो मौत से नहीं डरते, वही जीना जानते हैं। 

४७) नसीहत देना तथा आलोचना करना आसान काम है।  मुश्किल काम है चुप रहना और आलोचना सुन्ना। 

४८) आवश्यक नहीं की हर लड़ाई जीती ही जाए, आवश्यक यह है कि  हर हार से कुछ सीखा जाये। 

४९) ख़ुशी उनको नहीं मिलती जो अपनी शर्तों पर ज़िंदगी जिया करते हैं।  ख़ुशी उनको मिलती है, जो दूसरों की ख़ुशी के लिए अपनी शर्तें बदल लिया करते हैं। 

५०) स्वयं में बहुत सी कमियों के बाद यदि मैं स्वयं से प्रेम कर सकता हूँ तो फिर दूसरों में थोड़ी-बहुत कमियों की वजह से उनसे घृणा कैसे कर सकता हूँ? 
   



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