राजयोग द्वारा प्राप्त सूक्ष्म शक्तियाँ-8 major powers of Rajyoga Meditation

राजयोग द्वारा प्राप्त सूक्ष्म शक्तियाँ 





भौतिक विकास की एकपंखीय दौड़ में लगा समाज नित्य नयी भयावह समस्याओं से ग्रसित होता जा रहा है। नौनिहालों में फैलती हिंसा,युवाओं में पसरती अपराधवृत्ति, शोषण में सिसकती नारी, पेट की आग में झुलसती गरीबी, सेवा को तरसता बुढ़ापा और इसी तरह अनेक अंतहीन समस्याएं आज संसार में व्याप्त है जिन्होंने प्रत्येक व्यक्ति को अति कमज़ोर व बेबस कर दिया है। 
हर इंसान इनसे मुक्त होने की चाह रखते हुए भी उबर नहीं पाता क्योंकि वह सही विधि नहीं जनता। राजयोग ही एक ऐसी विधि है जिससे हम स्थूल एवं सुक्ष्म शक्तियां प्राप्त कर अपने जीवन को सही दिशा प्रदान कर सकते हैं।  
राजयोग द्वारा प्राप्त कुछ सुक्ष्म शक्तियां इस प्रकार है-

१) महसूसता की शक्ति- वह क्षण हमारे लिए अनमोल होता है जब हम अपनी कमी- कमजोरी को महसूस करते है क्योंकि उसी क्षण हम उसको निकालने का संकल्प करते हैं।  स्वयं के अलावा अन्य आत्मा की कमी-कमजोरी को, उसकी परवश स्थिति को महसूस कर, उसके प्रति भी दया भावना का संकल्प करते हैं एवं स्वयं के साथ-साथ उसके संस्कार परिवर्तन के लिए भी परमात्मा से सकाश प्राप्त कर उस आत्मा तक पहुंचाते हैं।  

२) परिवर्तन की शक्ति- महसूसता के बाद परिवर्तन शक्ति स्वतः ही काम करती है। परमात्मा प्रतिदिन हमें मुरली के द्वारा अनेक इशारे देते हैं और किस मुरली की कौन-सी शिक्षा मेरे परिवर्तन में मदद करेगी,पता नहीं। ज़िंदगी में किसी भी क्षण परिवर्तन आ सकता है अतः अर्जुन की तरह हर इशारे का अर्जन आवश्यक है। 

३) मनन शक्ति- ज्ञान मुरली की गहराईयों में जाना ही मनन शक्ति है। परमात्मा की प्रतिदिन की शिक्षा पर अपनी बुद्धि केंद्रित कर, उसके राज़ को जान कर उनके फायदे पा सकते हैं। 

४)एकाग्रता की शक्ति- एकनामी अर्थात एक शिवबाबा का स्मरण हमें एकाग्रचित बनाता है। बुद्धि का भटकना बंद हो जाता है और हम संकल्पों की बाढ़/तूफानों से स्वयं को सुरक्षित रख सकते हैं एवं अंतर्मुखी बन सदा सुखी रह सकते हैं। 

)सत्यता की शक्ति- सत्य बाप के बच्चे कभी भी सत्यता का दामन छोड़ नहीं सकते क्योंकि सत्य को प्रमाण की आवश्यकता नहीं रहती। सच्चा इंसान स्वयं से,परमपिता से एवं अपने लौकिक-अलौकिक परिवार के साथ सदा सच्चा रहता है।  


६)निडरता/निर्भयता की शक्ति- जहां सत्यता है वहाँ निडरता स्वतः ही आ जाती है क्योंकि साँच को आंच नहीं। जहाँ कोई आंच या मुश्किल नहीं वहाँ ही निर्भयता रहती है। राजयोग हमें हर परिस्थिति में निर्भय रहने की प्रेरणा देता है। 

७)क्षमा की शक्ति- स्वयं की गलतियों के लिए क्षमा मांगने वाला और अन्य अनेक आत्माओं द्वारा किये गए गलत कर्मों के लिए उन्हें क्षमा करने वाला व्यक्ति महान बनता है। क्षमा की शक्ति हमें शील प्रदान करती है। क्षमा का वास्तविक स्वरुप है कि हम सर्व के प्रति क्षमाशील बनें न कि सिर्फ अपनों के प्रति। 

८)शीतलता की शक्ति- कबीर दास जी का एक दोहा है,"ऐसी वाणी बोलिये मन का आपा खोय, औरन को शीतल करे,खुद भी शीतल होय।" कबीर जी ने अपने दोहे में शीतलता को बहुत ही सटीक रूप से परिभाषित किया है की औरों के साथ-साथ स्वयं को भी शीतल रखना अति आवश्यक है। परमात्मा पिता भी शीतलता के सागर हैं। उनकी छत्रछाया की शीतल किरणें विकार,लगाव और पश्चाताप की अग्नि को अंश सहित शीतल कर सकती हैं। अंश से ही वंश पैदा होता है। यह अनुभव सिद्ध है कि राजयोग से स्थूल एवं सुक्ष्म शक्तियां अर्जित करना आज के तमोप्रधान वातावरण में अति आवश्यक एवं लाभकारी है। 


"अमृत पीने वाले की नहीं पर विष पीने वाले की तस्वीर घर-घर में है"

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